रुद्रपुर के रवींद्रनाथ टैगोर पार्क से उठी अधिकारों की हुंकार: 60 दिनों के संघर्ष के बाद सुब्रत कुमार विश्वास के नेतृत्व में सैकड़ों युवाओं ने रक्त से लिखा इतिहास

रुद्रपुर के रवींद्रनाथ टैगोर पार्क से उठी अधिकारों की हुंकार: 60 दिनों के संघर्ष के बाद सुब्रत कुमार विश्वास के नेतृत्व में सैकड़ों युवाओं ने रक्त से लिखा इतिहास


रुद्रपुर, 5 जुलाई। उत्तराखंड के रुद्रपुर स्थित रवींद्रनाथ टैगोर पार्क में विश्व हिंदू बंगाली एकता मंच के नेतृत्व में चल रहे “आरक्षण हमारा अधिकार” आंदोलन ने रविवार को अपने संघर्ष के लगातार 60 दिन पूरे कर लिए। इस अवसर पर बंगाली समाज के सैकड़ों युवा, महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि धरनास्थल पर पहुंचे और आंदोलन को अपना समर्थन दिया। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सुब्रत कुमार विश्वास के नेतृत्व में आयोजित रक्त-हस्ताक्षर अभियान के दौरान युवाओं ने अपने खून से हस्ताक्षर कर भारत के माननीय राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तथा उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, तेलंगाना, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और झारखंड के मुख्यमंत्रियों को ज्ञापन भेजे।
ज्ञापन में पुनर्वासित बंगाली समाज की वर्षों से लंबित मांगों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाते हुए शीघ्र न्याय की मांग की गई। आंदोलनकारियों का कहना था कि यह केवल किसी एक राज्य या संगठन का आंदोलन नहीं, बल्कि पूरे भारत में बसे पुनर्वासित बंगाली समाज के सम्मान, संवैधानिक अधिकार, सामाजिक न्याय और पहचान की लड़ाई है।
धरनास्थल पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए आंदोलन के संयोजक सुब्रत कुमार विश्वास ने कहा कि पिछले 60 दिनों से समाज के युवा पूरी निष्ठा और अनुशासन के साथ शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं। अनेक कठिन परिस्थितियों, प्रशासनिक दबाव और विभिन्न चुनौतियों के बावजूद आंदोलन का उत्साह कम नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि बंगाली समाज अपने अधिकारों के लिए संविधान के दायरे में रहकर संघर्ष कर रहा है और जब तक न्याय नहीं मिलेगा, यह आंदोलन निरंतर जारी रहेगा।
रक्त-हस्ताक्षर अभियान को आंदोलन का ऐतिहासिक चरण बताते हुए उन्होंने कहा कि जब वर्षों तक ज्ञापन, धरना और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब समाज को अपनी पीड़ा सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए ऐसे प्रतीकात्मक कदम उठाने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं के रक्त की प्रत्येक बूंद समाज के सम्मान, समान अधिकार और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए समर्पित है।
सभा में बंगाली समाज की प्रमुख मांगों को दोहराते हुए कहा गया कि पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा और मेघालय की तर्ज पर पूरे भारत में पुनर्वासित बंगाली समाज को “एक देश–एक कानून” के सिद्धांत के तहत अनुसूचित जाति (एससी) का दर्जा दिया जाए। समाज का कहना है कि एक ही समुदाय को अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग संवैधानिक दर्जा मिलना समानता के सिद्धांत के अनुरूप नहीं है।
दूसरी मांग के रूप में कहा गया कि जिन पुनर्वासित बंगाली परिवारों को आज तक भूमि का वैधानिक आवंटन नहीं किया गया है, उन्हें शीघ्र भूमि आवंटित की जाए तथा जिन परिवारों को वर्षों से भूमि पर कब्जा होने के बावजूद स्वामित्व अधिकार नहीं मिला है, उन्हें भूमिधर अधिकार एवं स्थायी भूमि पट्टा प्रदान किया जाए।
तीसरी मांग में समाज ने पूरे देश में एक समान जाति प्रमाण-पत्र व्यवस्था लागू करने तथा उसे पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने की मांग उठाई। आंदोलनकारियों का कहना था कि वर्तमान में अलग-अलग राज्यों की अलग-अलग व्यवस्थाओं के कारण समाज के लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
चौथी मांग के रूप में बंगाली समाज ने उन क्षेत्रों के सरकारी विद्यालयों में बांग्ला भाषा की शिक्षा प्रारंभ करने की मांग की, जहां बंगाली समाज की पर्याप्त आबादी निवास करती है। वक्ताओं ने कहा कि मातृभाषा किसी भी समाज की संस्कृति, इतिहास और पहचान का महत्वपूर्ण आधार होती है और उसे शिक्षा व्यवस्था में उचित स्थान मिलना चाहिए।
इस अवसर पर युवा नेता संजय ने कहा कि यदि सरकार शीघ्र ही बंगाली समाज की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो आंदोलन को अगले चरण में ले जाया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि पहले क्रमिक अनशन प्रारंभ किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर आमरण अनशन भी किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह आंदोलन किसी सरकार या राजनीतिक दल के विरोध का नहीं, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों को प्राप्त करने का आंदोलन है।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि यह संघर्ष केवल वर्तमान पीढ़ी का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सम्मान, शिक्षा, रोजगार, भूमि अधिकार और सामाजिक न्याय के भविष्य को सुरक्षित करने की लड़ाई है। उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकारों से बंगाली समाज की मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।
इस अवसर पर कांग्रेस नेता उत्तम आचार्य, पूर्व प्रत्याशी मोहन खेड़ा, संजय, अमित कुमार, विकास विश्वास, पवित्र सील, सुब्रतन कुमार, नितिन विश्वास, गौरांग सरकार, तरुण विश्वास, विद्युत मंडल, सिद्धार्थ, सुभाष राय, धीरज विश्वास, डॉ. शुभ्रो चक्रवर्ती, राजू विश्वास, अभिमन्यु क्षण, अमित मंडल, रंजीत कुमार मंडल, इंद्रजीत, पंकज राय, सुरेश विश्वास, विद्युत राय सहित बड़ी संख्या में समाज के युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं वरिष्ठजनों ने आंदोलन को समर्थन दिया और रक्त-हस्ताक्षर अभियान में सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थित लोगों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि जब तक पुनर्वासित बंगाली समाज को उसके संवैधानिक अधिकार, अनुसूचित जाति का दर्जा, भूमि अधिकार, समान पहचान, मातृभाषा का अधिकार और सामाजिक न्याय प्राप्त नहीं हो जाता, तब तक “आरक्षण हमारा अधिकार” आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से जारी रहेगा। आंदोलनकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि उनका यह संघर्ष केवल आज के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों, सम्मान और सुरक्षित भविष्य की मजबूत नींव साबित होगा।
