गांवों में उद्यमिता की नई उड़ान, आत्मनिर्भर उत्तराखंड की मजबूत पहचान लखपति दीदी से करोड़पति बनने की ओर बढ़ रही उत्तराखंड की मातृशक्ति

गांवों में उद्यमिता की नई उड़ान, आत्मनिर्भर उत्तराखंड की मजबूत पहचान

लखपति दीदी से करोड़पति बनने की ओर बढ़ रही उत्तराखंड की मातृशक्ति
*स्थानीय उत्पादों को बाजार, ग्रामीण उद्यमिता को नया विस्तार*
*पलायन नहीं, गांवों में रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर*

रुद्रपुर ।सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को देहरादून में आयोजित मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना चौपाल कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। जिसका सजीव प्रसारण जिला मुख्यालय विकास भवन रुद्रपुर में सैकड़ों महिला उद्यमियों ने देखा। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में 39 लखपति दीदी एवं महिला उद्यमियों को सम्मानित किया। जिसमें जनपद ऊधम सिंह नगर की तीन महिला उद्यमी रश्मि तिवारी,संगीता व भगवती सागर भी शामिल थी।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की गई छह पुस्तिकाओं का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि इन पुस्तिकाओं के माध्यम से प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी प्राप्त हो सकेगी और वे उनका लाभ उठा सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान राज्य स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाली लखपति दीदियों एवं महिला उद्यमियों को सम्मानित करते हुए प्रशस्ति पत्र प्रदान किए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि उत्तराखंड में हो रहे सकारात्मक बदलावों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की हमारी बहनें आज लखपति दीदी बन रही हैं और अब करोड़पति बनने की दिशा में अग्रसर हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं का सम्मान करते समय ऐसा लग रहा था कि हम स्वयं सम्मानित हो रहे हैं। यह देखकर प्रसन्नता होती है कि हमारे गांवों की महिलाएं प्रदेश के विकास में केवल सहभागी ही नहीं बन रही हैं, बल्कि अपने सामर्थ्य, परिश्रम और पूरी क्षमता के बल पर उत्तराखंड को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण पूर्व में पलायन की स्थिति बनी रही, लेकिन तब और अब में फर्क है। आज लखपति दीदियां और महिला उद्यमी अपनी मेहनत, सामर्थ्य एवं कौशल के बल पर उत्कृष्ट कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जब वे महिलाओं के चेहरों पर प्रसन्नता, संतोष, सुकून, आत्मसंतोष और आत्मविश्वास का भाव देखते हैं तो उन्हें गर्व होता है। जो महिलाएं पहले अपने घर तक सीमित रहकर परिवार चलाती थीं, वे आज घर-परिवार के साथ-साथ गांव और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी योगदान दे रही हैं तथा कठिन से कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि हमारे प्रदेश का परिवेश कठिन है और इन्हीं कठिन परिस्थितियों ने हमें सिखाया है कि राहें कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि इरादे मजबूत हों तो लक्ष्य तक पहुंचने से कोई शक्ति नहीं रोक सकती।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे किसान कठिन परिस्थितियों में कार्य करने का अनुभव रखते हैं और हमारे स्थानीय उत्पादों में देश-दुनिया के बाजार तक पहुंचने की क्षमता है। आवश्यकता केवल इस बात की है कि उन्हें सही दिशा, मार्गदर्शन और नए अवसर उपलब्ध कराए जाएं। इसी उद्देश्य से मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि इस योजना के माध्यम से युवाओं, महिलाओं तथा विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हों। विशेषकर युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि अपनी योग्यता और क्षमता के अनुरूप रोजगार उपलब्ध कराने वाला बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की महिलाएं प्रत्येक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रही हैं और गांवों के साथ-साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रही हैं। हमारे किसान अब बिचौलियों के बजाय सीधे बाजार में अपने उत्पाद उचित मूल्य पर बेच रहे हैं। मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना भी इसी सोच को धरातल पर उतारने का महत्वपूर्ण माध्यम है। योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य कर रहे उद्यमियों, माताओं-बहनों एवं नौजवानों को अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के माध्यम से अभी तक 13 हजार से अधिक उद्यमियों को सहयोग प्रदान किया जा चुका है तथा 8 हजार से अधिक महिला उद्यमियों एवं स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को उद्यमिता से जोड़ा गया है, जिससे उन्हें आजीविका के नए अवसर प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि ये केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि किसी मां, बहन की मेहनत, उसकी उम्मीद और किसी परिवार के उज्ज्वल भविष्य की नींव हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की मातृशक्ति जिस आत्मविश्वास और सामर्थ्य के साथ आगे बढ़ रही है, वह हम सभी के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से पांच लाख से अधिक ग्रामीण महिलाओं को 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जा चुका है। उन्होंने कहा कि वे प्रदेश की मातृशक्ति की मेहनत, उद्देश्य और सामर्थ्य को प्रणाम करते हैं। प्रदेश की तीन लाख बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें अब रुकना नहीं है, बल्कि करोड़पति बनने की दिशा में आगे बढ़ना है। प्रदेश की बहनों ने साबित किया है कि महिलाओं को अवसर मिलने पर वे कोई भी कार्य कर सकती हैं, गांव बदल सकती हैं और परिवारों का भविष्य बदल सकती हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की बहनें पहाड़ी मसालों से लेकर मंडुवा, झंगोरा, दाल, शहद, अचार, जैम, हस्तशिल्प, ऊनी उत्पाद और स्थानीय कलाओं को व्यवसाय का रूप देकर आजीविका का बड़ा माध्यम बना रही हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं से आह्वान किया है कि वे अपने खर्च का कम से कम 5 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं द्वारा बनाए गए विभिन्न उत्पादों पर जरूर खर्च करें,ताकि महिला उद्यमियों को सम्मान और प्रोत्साहन दोनों मिल सकें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक बहनें लखपति दीदी बनें और आगे मेहनत करते हुए करोड़पति बनने की दिशा में आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री ने सभी बहनों को शुभकामनाएं देते हुए रक्षाबंधन की बधाई दी। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं को दो दिन तक बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा भी प्रदान की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे द्वारा बनाए जा रहे उत्पाद केवल उत्पादन तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें डिजाइनिंग, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग से जोड़ा जाए। हमारा लक्ष्य केवल उत्पाद बनाना नहीं, बल्कि उत्पाद के लिए बाजार उपलब्ध कराना और उसके विपणन के पर्याप्त अवसर सुनिश्चित करना भी है। हमारी बड़ी सफलता तब होगी जब उत्तराखंड के गांवों में तैयार उत्पाद निकलकर देश के बड़े-बड़े बाजारों तक पहुंचेंगे। इसी सोच के साथ राज्य सरकार द्वारा हाउस ऑफ हिमालयाज की नींव रखी गई है, जो प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को मजबूत पहचान और व्यापक बाजार उपलब्ध कराने का माध्यम बन रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘लोकल टू ग्लोबल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे मंत्र दिए हैं, जिन्हें राज्य सरकार धरातल पर उतारने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का विकास तेजी से हो रहा है। आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं और भारत आज प्रत्येक क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और मिट्टी की खुशबू हमारे उत्पादों को खरीदने वाले प्रत्येक व्यक्ति को महसूस होनी चाहिए। इसके लिए बाजार की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में ग्रामीण हाट, विपणन केंद्र, कलेक्शन सेंटर और एग्री सर्विस सेंटर जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है।मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य पलायन को रोकना भी है। उत्तराखंड में अपार संभावनाएं हैं और राज्य सरकार उन संभावनाओं को अवसरों में बदलने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने युवाओं पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि हमारे युवा केवल ‘जेनजी’ नहीं, बल्कि इंजी हैं (इंडियन जेनरेशन)हैं, जो विकसित भारत के संकल्प को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।उन्होंने कहा कि गांव मजबूत होगा तो राज्य मजबूत होगा और राज्य मजबूत होगा तो देश मजबूत होगा। इसी सोच के साथ राज्य सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब हमें ऐसे गांव बनाने हैं,जहां के युवा और मातृशक्ति गांव में रहकर ही आत्मनिर्भर बनें और अपना रोजगार स्थापित करें। हमें ऐसे उत्पाद तैयार करने हैं जिन्हें देखकर देश-दुनिया का उपभोक्ता कहे कि यह उत्तराखंड का उत्पाद है, इसमें कोई मिलावट नहीं है, इसकी पैकेजिंग अच्छी है, इसका मूल्य उचित है और इसमें उत्तराखंड की खुशबू है।
उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास होना चाहिए कि पलायन हमारी मजबूरी नहीं, बल्कि विकल्प बने। गांव केवल रहने की जगह न होकर विकास और उद्यमिता के केंद्र बनें। उन्होंने कहा कि हम सभी मिलकर संकल्प लें कि प्रदेश के प्रत्येक गांव में ऐसे अवसर पैदा किए जाएंगे, जिससे गांव की मातृशक्ति और युवा गांव में रहकर ही आत्मनिर्भर बन सकें।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की कि देहरादून के 13 गांवों में स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों के लिए राज्य स्तरीय विपणन केंद्र खोला जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण महिलाओं एवं स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा तथा उनकी आय एवं उद्यमिता को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।
जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया व ब्लॉक प्रमुख रीना गौतम ने मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना प्रचार रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया,प्रचार जागरूकता रथ जनपद के सभी ब्लॉक व न्यायपंचायत में जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रचार कर विस्तृत जानकारियां देगा।
विकास भवन में आयोजित मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना चौपाल के सजीव प्रसारण के बाद मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शासनी ने उद्यमियों के साथ संवाद करते हुए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रेरित करने के साथ ही उनके द्वारा उत्पादित उत्पादों की गुणवत्ता एवं बेहतर पैकेजिंग पर भी जोर दिया ताकि डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से उन्हें बाजार उपलब्ध कराया जा सके। महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों का सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार प्रसार के लिए सीडीओ ने सभी खंड विकास अधिकारियों को अपने-अपने ब्लाक से बेहतर उत्पादों का प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी ने 39 उत्कृष्ट महिला एवं पुरुष उद्यमियों को सम्मानित किया। जिसमें प्रियंका,विजयलक्ष्मी,मूलोदेवी,कुसुम,अमरवती,नीतू,ललिता,निर्मला देवी,पूजा मेहता,शांति देवी,मंजू देवी,केशमी देवी,सोनिया माँझी,सीता वर्मा,ममता राही,शांति देवी,गायत्री मलिक,बबली कोरंगा,मीना देवी,उर्मिला बोरा,पूनम,गुड़िया मोर्या,रानू अग्रवाल,रेखा नरूला,सुनीता देवी,सीमा कोरंगा,ममता मेहरा,कोशल्या, रेखा सहित अमित कुमार,विजय कुमार,विकास,आदि अन्य उद्यमी शामिल रहे।तथा कृषि,पशुपालन,उद्योग,उद्यान आदि विभागों के अधिकारियों द्वारा विभाग से संचालित योजनाओं की जानकारी महिला उद्यमियों को दी। कार्यक्रम में विभागों के साथ महिला उद्यमियों ने संवाद करते हुए सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारने हेतु अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों व स्वयं सहायता समूहों द्वारा स्टाल लगाए गए।
इस अवसर पर ब्लॉक प्रमुख रीना गौतम,सांसद प्रतिनिधि जितेंद्र गौतम,परियोजना निदेशक हिमांशु जोशी, एपीडी रमा गोस्वामी, महाप्रबंधक उद्योग विपिन कुमार,मुख्य कृषि अधिकारी डॉ.वीके यादव,मुख्य उद्यान अधिकारी सतीश शर्मा,सीवीओ डॉ आशुतोष जोशी,खंड विकास अधिकारी अतिया परवेज़, असित आनंद सहित अन्य अधिकारी एवं सैकड़ों महिला उद्यमी उपस्थित रही।
