बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता जरूरी-छेड़छाड़ और अनुचित व्यवहार पर चुप न रहें–कार्यशाला में मिला सुरक्षा का पाठ

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Siv arora
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बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता जरूरी-छेड़छाड़ और अनुचित व्यवहार पर चुप न रहें–कार्यशाला में मिला सुरक्षा का पाठ

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं,बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। बच्चों को उनके अधिकारों,सुरक्षित-असुरक्षित व्यवहार की पहचान और किसी भी विपरीत परिस्थिति में मदद मांगने के लिए जागरूक करना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य को लेकर महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के तत्वावधान में शनिवार को संस्कार पब्लिक स्कूल अगरोड़ा में एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का आयोजन मिशन शक्ति वन स्टॉप सेंटर द्वारा किया गया। कार्यशाला में छात्र-छात्राओं को छेड़छाड़,अनुचित व्यवहार तथा असहज परिस्थितियों से बचाव के विभिन्न उपायों के बारे में जानकारी दी गई। बच्चों को सरल और सहज तरीके से समझाया गया कि यदि कोई व्यक्ति उनके साथ गलत व्यवहार करता है,उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास करता है या ऐसा कोई व्यवहार करता है जिससे वे असहज महसूस करें,तो उसे नजरअंदाज करने अथवा चुप रहने के बजाय तत्काल किसी भरोसेमंद व्यक्ति को इसकी जानकारी देनी चाहिए। कार्यशाला में बच्चों को बताया गया की सुरक्षा के प्रति जागरूकता किसी भी अप्रिय घटना को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बच्चों को अपने आसपास होने वाली गतिविधियों के प्रति सजग रहने,संदिग्ध या अनुचित व्यवहार की स्थिति में सुरक्षित स्थान पर जाने तथा आवश्यकता पड़ने पर अभिभावक,शिक्षक अथवा किसी विश्वसनीय व्यक्ति से सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया। विशेष रूप से बच्चों को यह संदेश दिया गया कि गलत व्यवहार के लिए बच्चा कभी जिम्मेदार नहीं होता और ऐसी किसी भी घटना को छिपाने के बजाय उसके बारे में बताना जरूरी है। उन्हें भरोसा दिलाया गया कि परेशानी की स्थिति में सहायता उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न सरकारी सेवाएं और हेल्पलाइन संचालित हैं। वन स्टॉप सेंटर की प्रशासिका लक्ष्मी रावत ने छात्र-छात्राओं को महिला हेल्पलाइन 181,चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 तथा मिशन शक्ति वन स्टॉप सेंटर की सेवाओं के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार की समस्या,असुरक्षित स्थिति अथवा सहायता की आवश्यकता होने पर संबंधित हेल्पलाइन और सहायता केंद्रों से संपर्क किया जा सकता है। उन्होंने बच्चों से कहा कि वे किसी भी परेशानी को लेकर संकोच न करें और समय रहते अपने माता-पिता,शिक्षक या अन्य भरोसेमंद व्यक्ति को जानकारी दें। लक्ष्मी रावत ने कहा कि जागरूकता और सही जानकारी बच्चों को न केवल असुरक्षित परिस्थितियों को पहचानने में सक्षम बनाती है,बल्कि उन्हें समय पर सहायता प्राप्त करने का रास्ता भी दिखाती है। उन्होंने विद्यालयों में इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों को नियमित रूप से आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। कार्यशाला में शिक्षकों को भी बच्चों की सुरक्षा और व्यवहार में आने वाले बदलावों के प्रति संवेदनशील रहने की आवश्यकता बताई गई। कहा गया कि बच्चे यदि किसी परेशानी से गुजर रहे हों तो कई बार सीधे अपनी बात नहीं कह पाते। ऐसे में अभिभावकों और शिक्षकों का सजग एवं संवेदनशील रवैया उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कार्यशाला के माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने,अपनी बात खुलकर रखने और जरूरत पड़ने पर मदद लेने की भावना विकसित करने का प्रयास किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य पीटर मसीह सहित गीता भंडारी,वंदना नेगी,रचना थपलियाल,सुनीता नेगी,प्रीति रावत,ऋतु नेगी एवं अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे। कार्यशाला के अंत में बच्चों को सुरक्षित वातावरण के लिए जागरूक रहने,किसी भी अनुचित व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाने तथा जरूरत पड़ने पर उपलब्ध सहायता सेवाओं का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया।

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