मेहनत पर पानी : बेमौसम बरसात से किसानों के सर पर संकट के बादल, चौपट होने के कगार पर गेहूं की फसल* 

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मेहनत पर पानी : बेमौसम बरसात से किसानों के सर पर संकट के बादल, चौपट होने के कगार पर गेहूं की फसल*

 

*खेतों में गेहूं की फसल तैयार, खेत में हो रही धराशाई, अचानक बदले मौसम से बढ़ा बीमारी का खतरा*

 

मंडल ब्यूरो अनुभव शुक्ला लखनऊ

रायबरेली। जनपद में बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर रहा है। एक तरफ जहां कुछ दिन पहले तक खेतों में लहलहाती गेहूं की फसल किसानों के चेहरे पर मुस्कान ला रही थी, वहीं अब वहीं फसल खेतों में गिरी और भीगी हुई नजर आ रही है। अचानक बदले मौसम ने किसानों को गहरे संकट में डाल दिया है। अचानक बदले मौसम के मिजाज से रात में ठंड ने भी वापसी कर ली जिससे बीमारी का खतरा भी मंडराने लगा है। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश के कारण पकी हुई गेहूं की फसल जमीन पर गिर गई है। कई जगहों पर फसल पूरी तरह से भीग चुकी है, जिससे दानों की गुणवत्ता खराब होने का खतरा बढ़ गया है। सलोन कोतवाली क्षेत्र के मटका ग्राम सभा के पूरे दीन निवासी किसान बीरेंद्र मौर्या, विनय मिश्रा, विजय सरोज, कंडी गांव निवासी रामानुज पांडेय, ने बताया कि इस बार उन्होंने अच्छी पैदावार की उम्मीद में महंगा बीज, खाद और सिंचाई पर काफी खर्च किया था, लेकिन मौसम की इस मार ने उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। सबसे बड़ी समस्या अब कटाई को लेकर सामने आ रही है। गिरी हुई और भीगी फसल को काटना बेहद मुश्किल हो गया है। जहां पहले मशीन से आसानी से कटाई हो जाती थी, वहीं अब मजदूरों की जरूरत पड़ रही है, जिससे लागत दोगुनी हो गई है। इसके अलावा भीगी फसल को सुखाने में भी अतिरिक्त समय और खर्च लगेगा। किसानों का कहना है कि अगर जल्द ही मौसम साफ नहीं हुआ तो नुकसान और बढ़ सकता है। कई किसानों ने सरकार से मदद की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि ऐसे समय में प्रशासन को सर्वे कराकर मुआवजा देना चाहिए, ताकि उनकी कुछ भरपाई हो सके। स्थानीय प्रशासन की ओर से भी हालात पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि नुकसान का आकलन किया जाएगा और रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। हालांकि किसानों को तुरंत राहत मिलने की उम्मीद कम ही नजर आ रही है। इस बेमौसम बारिश ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि खेती पूरी तरह मौसम पर निर्भर है और जरा सी प्राकृतिक आपदा किसानों की सालभर की मेहनत को बर्बाद कर सकती है। अब सभी की नजरें मौसम के मिजाज और सरकार की राहत पर टिकी हुई हैं।

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