
IAS संजय प्रसाद को बड़ी कानूनी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने रोकी हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणियां


नई दिल्ली, 11 जून। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को बड़ी राहत देते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें उनके आचरण पर कड़ी टिप्पणियां की गई थीं तथा केंद्र सरकार को उनकी भविष्य की नियुक्तियों के लिए उपयुक्तता का आकलन करने का निर्देश दिया गया था।
मामला राज्य में पुलिस सुधारों से संबंधित न्यायालयी निर्देशों के अनुपालन से जुड़ा है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिकारी के रवैये पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा था कि न्यायालय के आदेशों के क्रियान्वयन में अपेक्षित सहयोग नहीं दिया जा रहा है। इसके बाद अदालत ने मामले को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के समक्ष भेजने का निर्देश दिया था, ताकि भविष्य में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के लिए उनकी उपयुक्तता पर विचार किया जा सके।
हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए संजय प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति अतुल चंद्रकार की पीठ ने की। प्रारंभिक सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट की विवादित टिप्पणियों और संबंधित निर्देशों के संचालन पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल हाई कोर्ट की वे टिप्पणियां प्रभावी नहीं रहेंगी, जिनमें अधिकारी के आचरण पर सवाल उठाए गए थे। साथ ही केंद्र सरकार द्वारा उनकी प्रशासनिक उपयुक्तता के मूल्यांकन से संबंधित निर्देश भी अगली सुनवाई तक स्थगित रहेंगे।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही, न्यायालयी आदेशों के पालन तथा न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच संतुलन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों से जुड़ा हुआ है। आने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट इस बात पर विस्तार से विचार करेगा कि हाई कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणियां और दिए गए निर्देश किस सीमा तक न्यायसंगत थे।
फिलहाल मामले की अगली सुनवाई की प्रतीक्षा है और शीर्ष अदालत के अंतिम निर्णय पर प्रशासनिक तथा कानूनी हलकों की नजर बनी हुई है।
