77 वां सालाना उर्स कादरी इब्राहीमी राजशाही

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Siv arora
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77 वां सालाना उर्स कादरी इब्राहीमी राजशाही

मेरठ।हर साल की तरह इस साल भी कुत्बे अलम औलादे गौसे आज़म हजरत हाफिज सैयद मोहम्मद इब्राहीम शाह साहब कादरी राजशाही का सालाना उर्स ग्राम सरावा में पूरी शानो शौकत के साथ मनाया गया। महफिल का आगाज तिलावते कलाम ए पाक से खानकाह के इमाम हज़रत हाफ़िज़ व क़ारी दानिश राजशाही अलीमी साहब ने किया। सरपरस्ती दरगाह के सज्जादा नशीन पीरे तरीकत हजरत मौलाना हमीदुल्लाह राजशाही इब्राहीमी अलीमी ने की सदारत हज़रत अल्लामा शम्स कादरी साहब प्रिंसिपल मदरसा इस्लामिया अरबिया अंदर कोर्ट ने की, निज़ामत के फ़राइज़ हज़रत हाफिज व क़ारी ताहिर साहब अशरफी ने अंजाम दिए, मेहमाने खुसूसी मुफ्ती रहमतुल्लाह साहब मिस्बाही रहे उन्होंने अपनी तकरीर में कहा कि हजरत हाफिज इब्राहीम शाह ऐसे बुजुर्ग हैं जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी मखलूक की खिदमत और रब की इबादत में गुजार दी। और दुनिया को यही पैगाम दिया कि लोगों की मदद करते रहना और सखी बनना बख़ील नहीं क्योंकि अल्लाह सखावत पसंद करता हे और हम शहीद ए आज़म हुसैन अ के मानने वाले हे और हाफिज इब्राहीम शाह इमाम हुसैन अ ,की औलाद है जिनके दरबार से सब्र कनाअत ! सखावत इनके घर से चलती है! हज़रत मुफ्ती इश्तियाक उल कादरी साहब ने अपनी तकरीर में कहा कि हजरत हाफिज इब्राहिम शाह एक ऐसे बुजुर्ग हैं जिन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी में यही पैगाम दिया की तुम्हारे पास जो भी ज़रूरत मंद आ गया उसी की मदद करी चाहे वो किसी जाति या धर्म का हो आज भी उनके दरबार में साहिबे सज्जादह मौलाना हमीदुल्लाह राजशाही उनके बताए रास्ते पर चलकर बिना किसी भेद भाव सभी की मदद करते हैं l मुफ्ती रहीस साहब,क़ारी इसरार रज़ा राजशाही साहब, ने भी तकरीर पेश की,हाफिज मोहम्मद उमर ने अपनी तक़रीर में कहा की अहले बेत की मुहब्बत में सब कुछ मिलता है!शायरे इस्लाम इंतखाब आलम संभली, मुफ्ती नूर मोहम्मद जिगर मिस्बाही, मौलाना राशिद रजा, हाफिज़ ताहिर साहब सभी शायरों ने महफिल में खूब समा बांधा चार चांद लगा दिए,उर्स में चादर पेश की गई गुलपोशी लंगर पेश किया गया सभी धर्मो के लोगों ने खूब बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया उसके बाद दरगाह के सज्जादा नशीन पीरे तरीकत हजरत मौलाना हमीदुल्लाह राजशाही इब्राहीमी अलीमी ने अपने मुल्क भारत में अमन शांति आपसी भाईचारे व देश की तरक्की के लिए दुआ कराई सैकड़ों लोगों ने आमीन कहा उसके बाद सभी जायरीन पीरे तरीकत मौलाना हमीद उल्लाह राजशाही से दुआ व प्रशाद लेकर रुखसत हुए और मुरीदों ने विदेशों में भी प्रोग्राम लाइव देखा दुबई, साउथ अफ्रीक निशात खान अलिमी, जियाउल्लाह खान और उर्स शरीफ मैं काफी तादाद में लोग शामिल हुए व मुख्य रूप से आंसर खान, काशिफ खान, सूफी मोहम्मद अली, सूफी अशरफ उल्लाह, हाजी शमशाद, सूफी अशफाक, सूफी शकील, सूफी निशात उल्लाह, समीरउल्लाह, शाकिर चम्पू, डॉक्टर शोएब, हयात उल्लाह, हाजी अब्दुल करीम, जावेद खान, शहज़ाद खान, सूफी सलीम, बशारत खान, अजीम खान,इमरान खान, सलाउद्दीन सेफी, सूफी नईम, शमशाद खान, मास्टर सोनू , आरिफ उल्लाह, तारीक, सरफराज खान ,गुड्डू खान , जिक्रया खा , मुश्ताक खान ,हाजी अब्दुल गफ्फार, सूफी जाहिद, सूफी रियासत , सूफी इंतजार, हाफिज जुबेर, आस मोहम्मद, मास्टर महबूब अली, सरफराज़ खान किच्छा, सूफी इरफान, सूफी यूनुस, आसिफ, जलाल, सूफी महफूज, कारी नईम राजशाही, शाबाज खान, सूफी आसिफ साहफैज़ खान सहित सैकड़ों लोग शरीक हुए l

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