
सड़क निर्माण में बाधा के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, अग्रिम जमानत याचिका खारिज
नई दिल्ली, 15 जून: सुप्रीम कोर्ट ने सड़क निर्माण कार्य में कथित रूप से बाधा डालने के मामले में एक व्यक्ति और उसके सहयोगी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि विकास कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप को किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।मामला पंजाब के गुरदासपुर क्षेत्र में चल रहे सड़क निर्माण कार्य से जुड़ा है। आरोप है कि याचिकाकर्ताओं ने निर्माण कार्य में रुकावट पैदा की और संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के कामकाज में हस्तक्षेप किया। इन आरोपों के आधार पर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि कानून के दायरे में रहकर सूचना प्राप्त करना एक बात है, लेकिन सार्वजनिक परियोजनाओं के कार्यान्वयन में बाधा डालना स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
इससे पहले संबंधित उच्च न्यायालय भी आरोपियों को राहत देने से मना कर चुका था। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जांच एजेंसियों की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला सार्वजनिक विकास परियोजनाओं में अनावश्यक हस्तक्षेप और सरकारी कार्यों में बाधा पहुंचाने के मामलों को लेकर न्यायपालिका के सख्त रुख को दर्शाता है। साथ ही यह संदेश भी देता है कि किसी भी अधिकार का उपयोग कानून की सीमाओं के भीतर रहकर ही किया जाना चाहिए।

