एनजीओ समाज सेवा का माध्यम ही नहीं, बदलाव का मजबूत आधार: विभा पांडेय

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Siv arora
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एनजीओ समाज सेवा का माध्यम ही नहीं, बदलाव का मजबूत आधार: विभा पांडेय

 

एनजीओ समन्वय एवं विकास सम्मेलन में सामाजिक संस्थाओं और सरकार के बेहतर समन्वय पर दिया जोर

देहरादून। एनजीओ समन्वय एवं विकास सम्मेलन में धरा सेवा फाउंडेशन ट्रस्ट उत्तराखण्ड की अध्यक्ष विभा पांडेय ने सामाजिक संस्थाओं की भूमिका और चुनौतियों को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि NGO केवल संस्था या रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं, बल्कि समाज के जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचने का मजबूत माध्यम हैं।

विभा पांडेय ने कहा कि सामाजिक संस्थाएं रक्तदान, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण तथा गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों की सहायता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं। उन्होंने सरकार और NGO के बीच बेहतर समन्वय के लिए जिला एवं ब्लॉक स्तर पर नियमित बैठकें आयोजित करने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने अच्छे कार्य करने वाली संस्थाओं एवं स्वयंसेवकों को सम्मानित किए जाने पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि सम्मान से समाजसेवियों का मनोबल बढ़ता है और अन्य लोगों को भी सेवा कार्यों के लिए प्रेरणा मिलती है।

विभा पांडेय ने कहा कि NGO को केवल कार्यक्रमों तक सीमित न रहकर स्थायी और जमीनी स्तर पर प्रभाव डालने वाले प्रोजेक्ट तैयार करने चाहिए। उन्होंने गांवों को गोद लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और नशामुक्ति जैसे विषयों पर निरंतर कार्य करने का सुझाव दिया।

उन्होंने युवाओं को सामाजिक सेवा से जोड़ने, NGO में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार और NGO एक-दूसरे के विकल्प नहीं, बल्कि सहयोगी हैं। सरकार के पास योजनाएं और संसाधन हैं, जबकि NGO के पास समाज के बीच पहुंच और जमीनी अनुभव है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्री महेन्द्र भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद, डॉ. सन्देश यादव, सम्मेलन आयोजक तथा श्रीमती नलिनी त्रिखा तनेजा, जिला संयोजक NGO प्रकोष्ठ देहरादून महानगर सहित अन्य पदाधिकारी एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

सम्मेलन के दौरान धरा सेवा फाउंडेशन ट्रस्ट उत्तराखण्ड की अध्यक्ष विभा पांडेय एवं मुस्कान यादव को सम्मानित किया गया।

अंत में विभा पांडेय ने कहा कि सामाजिक संस्थाओं का उद्देश्य केवल सम्मान प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसा कार्य करना होना चाहिए कि समाज स्वयं उन्हें सम्मान देने के लिए आगे आए। उन्होंने सभी संस्थाओं से पारदर्शिता, सेवा और समाजहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

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