देश की शिक्षा व्यवस्था बनी वसूली तंत्र: गावा कांग्रेस नेताओं ने कहा-पेपर लीक, महंगी कोचिंग और बेरोजगारी ने युवाओं के सपनों को तोड़ा

देश की शिक्षा व्यवस्था बनी वसूली तंत्र: गावा

कांग्रेस नेताओं ने कहा-पेपर लीक, महंगी कोचिंग और बेरोजगारी ने युवाओं के सपनों को तोड़ा

रूद्रपुर। देश की शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, महंगी होती पढ़ाई, कोचिंग सिस्टम और बढ़ती बेरोजगारी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा छात्रों की समस्याओं को लेकर शुरू किये गये ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत जिला कांग्रेस कार्यालय में जिलाध्यक्ष हिमांशु गावा ने प्रेस वार्ता कर शिक्षा और रोजगार व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किये। इस दौरान महानगर कांग्रेस अध्यक्ष ममता रानी और पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने भी युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
प्रेस वार्ता में जिलाध्यक्ष हिमांशु गावा ने कहा कि राहुल गांधी ने कोटा में छात्रों से संवाद कर देश की शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को सामने रखा है। उन्होंने कहा कि आज करोड़ों युवा बेहतर भविष्य का सपना लेकर मेहनत कर रहे हैं, लेकिन वर्तमान व्यवस्था उन्हें आगे बढ़ाने के बजाय बाहर करने वाली ‘रिजेक्शन व्यवस्था’ बनती जा रही है।
उन्होंने कहा कि हजारों छात्र एक सपना लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की दौड़ में उतरते हैं, लेकिन अवसर बेहद सीमित हैं। करीब 3000 छात्रों में सिर्फ 1 आईएएस बनता है, 3000 में केवल 30 छात्र आईआईटी तक पहुंचते हैं और लगभग 180 छात्र डॉक्टर बन पाते हैं। ऐसे में लाखों मेहनती छात्रों को असफलता और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ता है।
गावा ने कहा कि यह सिर्फ परीक्षा की लड़ाई नहीं बल्कि देश के करोड़ों परिवारों के संघर्ष की कहानी है। अभिभावक अपने बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर और अधिकारी बनाने के सपने के लिए अपनी जीवनभर की कमाई लगा देते हैं। कोचिंग फीस, हॉस्टल, किताबें और तैयारी का खर्च आम परिवारों के लिए भारी बोझ बन चुका है।
उन्होंने कहा कि सिर्फ नीट की तैयारी करने वाले करीब 22 लाख छात्रों के परिवारों का निजी खर्च लगभग 1.32 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। यह खर्च भारत सरकार के शिक्षा बजट के लगभग बराबर बताया गया है। एक छात्र पर औसतन लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं, लेकिन इसके बाद भी सफलता की कोई गारंटी नहीं होती।
गावा ने कहा कि सिर्फ नीट ही नहीं बल्कि जेईई,यूपीएससी, एसएससी और रेलवे जैसी बड़ी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं पर भी भारी आर्थिक बोझ है। आंकड़ों के अनुसार इन प्रमुख परीक्षाओं की तैयारी पर परिवारों द्वारा किया जाने वाला खर्च करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच रहा है, जिसे कांग्रेस ने सरकार के शिक्षा बजट से कई गुना अधिक बताया है।
उन्होंने कहा कि आज शिक्षा व्यवस्था के चारों ओर समस्याओं का जाल बन चुका है। एक तरफ महंगी कोचिंग व्यवस्था है तो दूसरी तरफ पेपर लीक, परीक्षा रद्द होना, दोबारा परीक्षा, भर्ती प्रक्रिया में देरी और नौकरियों की कमी जैसी चुनौतियां युवाओं का मनोबल तोड़ रही हैं।
गावा ने कहा कि नीट पेपर लीक जैसी घटनाएं सिर्फ परीक्षा प्रणाली की विफलता नहीं बल्कि लाखों बच्चों के सपनों पर चोट हैं। छात्र वर्षों मेहनत करते हैं, परिवार कर्ज लेकर बच्चों को पढ़ाते हैं, लेकिन व्यवस्था की खामियों के कारण उनकी मेहनत प्रभावित होती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि नीट, सीबीएसई, पीएससी और एनटीए जैसी संस्थाओं से जुड़ी लगातार सामने आ रही समस्याओं ने छात्रों में तनाव और असुरक्षा बढ़ाई है। छात्र आत्महत्या की घटनाएं बढ़ना बेहद चिंताजनक है और सरकार को इस दिशा में गंभीर कदम उठाने चाहिए।
महानगर कांग्रेस अध्यक्ष ममता रानी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों को अवसर देना होना चाहिए, लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि बच्चे कम उम्र से ही भारी दबाव में आ जाते हैं। परीक्षा, कोचिंग और भविष्य की चिंता ने युवाओं के सामने मानसिक चुनौती खड़ी कर दी है।
उन्होंने कहा कि एक ओर परिवार लाखों रुपये खर्च कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी और रोजगार की कमी छात्रों की उम्मीदों को कमजोर कर रही है। सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जहां हर वर्ग के बच्चे को समान अवसर मिल सके।
पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने रोजगार के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि शिक्षा पूरी करने के बाद भी युवाओं को रोजगार के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। राहुल गांधी की प्रस्तुति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आंकड़ों के अनुसार 1000 छात्रों में केवल करीब 12 छात्र ही ग्रेजुएशन के बाद वेतन वाले औपचारिक रोजगार तक पहुंच पाते हैं। बड़ी संख्या में युवा बेरोजगारी या अस्थायी रोजगार की ओर जाने को मजबूर होते हैं।
उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में यह भी चिंता जताई गई है कि बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले युवा भी रोजगार की समस्या से जूझ रहे हैं। जब शिक्षा रोजगार से नहीं जुड़ पाएगी तो युवाओं में निराशा बढ़ेगी।
ठुकराल ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को कमाई का माध्यम नहीं बल्कि देश निर्माण का आधार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज छात्रों को ऐसी व्यवस्था चाहिए जिसमें वे बड़े सपने देख सकें, उन सपनों को पूरा करने का अवसर मिले और कम खर्च में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हासिल कर सकें।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने छात्रों से संवाद करते हुए भरोसा दिलाया है कि उनकी आवाज को मजबूती से उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस युवाओं के भविष्य, निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली और रोजगार के मुद्दे पर संघर्ष जारी रखेगी।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि ‘छात्रों की गूंज’ अभियान देश के करोड़ों छात्रों और युवाओं की आवाज है। यह अभियान शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पारदर्शिता और युवाओं को न्याय दिलाने की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है।
