गदरपुर में सफाई हड़ताल छठे दिन भी जारी, पालिका अध्यक्ष मिंटू गुंबर के आवास तक पहुंचा कर्मचारियों का गुस्सा

गदरपुर में सफाई हड़ताल छठे दिन भी जारी, पालिका अध्यक्ष मिंटू गुंबर के आवास तक पहुंचा कर्मचारियों का गुस्सा

चेयरमैन हाय-हाय’ के नारों से गूंजा गदरपुर, सफाई कर्मियों का आंदोलन हुआ और तेज
छह दिन से ठप सफाई व्यवस्था, झाड़ू हाथ में लेकर कर्मचारियों ने खोला पालिका प्रशासन के खिलाफ मोर्चा

गदरपुर। नगर पालिका परिषद गदरपुर के सफाई कर्मियों की हड़ताल मंगलवार को लगातार छठे दिन भी जारी रही। हड़ताल के चलते नगर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जगह-जगह कूड़े के ढेर लगने से लोगों को दुर्गंध और गंदगी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं अपनी मांगों को लेकर सफाई कर्मियों का आक्रोश भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
मंगलवार को सफाई कर्मियों ने बुधबाजार से हाथों में झाड़ू लेकर जोरदार विरोध रैली निकाली। रैली मुख्य बाजार से होते हुए नगर पालिका अध्यक्ष के आवास के बाहर भी पहुंची, जहां कर्मचारियों ने पालिका अध्यक्ष के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद रैली नगर पालिका परिषद कार्यालय पहुंची, जहां भी कर्मचारियों ने “चेयरमैन हाय-हाय” के नारे लगाते हुए प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
सफाई कर्मियों के समर्थन में भाजपा मंडल अध्यक्ष सुरेश खुराना, कांग्रेस नगर अध्यक्ष सिद्धार्थ भुसरी तथा आजाद समाज पार्टी के विधानसभा अध्यक्ष शाहेरुम उर्फ टोनी पठान भी रैली में शामिल हुए। तीनों नेताओं ने कर्मचारियों की मांगों का समर्थन करते हुए पालिका प्रशासन पर सवाल खड़े किए।
कांग्रेस नगर अध्यक्ष सिद्धार्थ भुसरी ने कहा कि पिछले छह दिनों से नगर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी है, जिससे आम जनता परेशान है। उन्होंने इसके लिए नगर पालिका चेयरमैन को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वे अपनी जिम्मेदारियों से बच रहे हैं, जबकि सफाई कर्मी लगातार अपनी समस्याओं को उठा रहे हैं।
भाजपा मंडल अध्यक्ष सुरेश खुराना ने कहा कि गरीब सफाई कर्मियों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है। उनकी जायज मांगों को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। उन्होंने पालिका प्रशासन से जल्द वार्ता कर समाधान निकालने की मांग की।
आजाद समाज पार्टी के विधानसभा अध्यक्ष शाहेरुम उर्फ टोनी पठान ने चेयरमैन और अधिशासी अधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि सफाई कर्मियों का संघर्ष पूरी तरह न्यायसंगत है और उनकी पार्टी हर परिस्थिति में कर्मचारियों के साथ खड़ी रहेगी।
रैली का नेतृत्व कर रहे सफाई कर्मी रजत कुमार ने कहा कि ठेका प्रथा समाप्त कर स्थानीय लोगों को आउटसोर्स के माध्यम से रोजगार दिया जाए। यही उनकी प्रमुख मांग है। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक हड़ताल और आंदोलन जारी रहेगा। वही समाचार लिखे जाने तक पालिका अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी दोनों से संपर्क किया तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया
*2 दिन में मांगे पूरी नहीं हुई तो पालिका कार्यालय व पालिका अध्यक्ष एवं सभी सभासदों के घरों के बाहर डाला जाएगा कूड़ा=रजत कुमार*
गदरपुर। नगर पालिका के सफाई कर्मचारियों के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे रजत कुमार ने चेतावनी दी है कि यदि अगले दो दिनों के भीतर उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके बाद नगर पालिका कार्यालय के बाहर व पालिका अध्यक्ष आवास के बाहर सहित 11 सभासदों के घरों के बाहर कूड़ा डाला जाएगा रजत कुमार का कहना है कि बार-बार मांगें उठाने के बावजूद कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है, जिसके चलते उन्हें आंदोलन तेज करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
*सफाई कर्मियों के समर्थन में उतरे भाजपा नगर अध्यक्ष, सियासत गरमाई*
*भाजपा में ‘मिंटू बनाम खुराना’ की चर्चा तेज, सफाई हड़ताल बनी वजह*
गदरपुर नगर पालिका की सफाई कर्मचारियों की हड़ताल अब केवल कर्मचारियों की मांगों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें राजनीतिक रंग भी साफ दिखाई देने लगा है। एक ओर नगर पालिका परिषद के भाजपा समर्थित अध्यक्ष मनोज कुमार मिंटू हड़ताल के मुद्दे पर कर्मचारियों के निशाने पर हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा नगर अध्यक्ष सुरेश खुराना खुले तौर पर सफाई कर्मियों के समर्थन में उतर आए हैं।
सुरेश खुराना ने सफाई कर्मियों की मांगों को जायज बताते हुए उनके साथ खड़े होने का संदेश दिया है। ऐसे में भाजपा के भीतर इस मुद्दे पर अलग-अलग रुख चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि जब एक ओर पालिका प्रशासन पर कर्मचारियों का आक्रोश है और दूसरी ओर पार्टी का नगर अध्यक्ष उन्हीं कर्मचारियों के समर्थन में खड़ा है, तो इससे संगठन और पालिका के बीच तालमेल पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
सफाई कर्मियों की हड़ताल और भाजपा नेताओं के अलग-अलग रुख ने गदरपुर की राजनीति को भी गर्मा दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन कर्मचारियों की मांगों पर क्या फैसला लेता है और भाजपा इस मुद्दे पर एकजुट रुख अपनाती है या नहीं।
