जन्मदिवस पर रोपे रुद्राक्ष-जामुन के समलौण पौधे,पर्यावरण संरक्षण का दिया अनूठा संदेश 

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Siv arora
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जन्मदिवस पर रोपे रुद्राक्ष-जामुन के समलौण पौधे,पर्यावरण संरक्षण का दिया अनूठा संदेश

श्रीनगर गढ़वाल। जन्मदिन की खुशियां जब प्रकृति के नाम हो जाएं तो वह केवल एक उत्सव नहीं रहता,बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन और हरियाली की सौगात बन जाता है। इसी भावना को साकार करते हुए जनपद पौड़ी गढ़वाल की जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं पूर्व निदेशक डीसीबी कोटद्वार आरती नेगी की पुत्री अनिध्या के जन्मदिवस को पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ यादगार बनाया गया। जन्मदिवस के अवसर पर उनके रिसोर्ट परिसर में रुद्राक्ष एवं जामुन के समलौण पौधों का रोपण किया गया। इस पहल के माध्यम से जहां जन्मदिवस को प्रकृति से जोड़ा गया,वहीं समाज को पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का प्रेरणादायी संदेश भी दिया गया। रोपे गए पौधों के संरक्षण और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी रिसोर्ट के कर्मचारियों ने ली। कार्यक्रम का संचालन समलौण आंदोलन के सलाहकार एवं ग्रामीण पत्रकार जगमोहन डांगी ने किया। उन्होंने कहा कि समलौण पौधारोपण केवल पौधा लगाने की प्रक्रिया नहीं,बल्कि जीवन के संस्कारों से जुड़ा एक भावनात्मक आंदोलन है। उन्होंने कहा कि जन्मदिवस,विवाह,नामकरण सहित जीवन के विभिन्न संस्कारों और महत्वपूर्ण अवसरों पर पौधारोपण करने की परंपरा समाज को प्रकृति के साथ जोड़ने का अनूठा माध्यम बन रही है। धीरे-धीरे यह पहल एक सामाजिक रीति-रिवाज और परंपरा का स्वरूप ले रही है। डांगी ने कहा कि यदि प्रत्येक परिवार अपने जीवन के महत्वपूर्ण अवसर को एक पौधे के साथ जोड़ दे तो आने वाले वर्षों में लाखों पौधे तैयार हो सकते हैं। यह आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा,हरियाली और सुरक्षित पर्यावरण देने की दिशा में बड़ा कदम होगा। उन्होंने क्षेत्रवासियों से वनों के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ जीवन के प्रत्येक महत्वपूर्ण संस्कार पर समलौण पौधारोपण करने की अपील की। जिला पंचायत उपाध्यक्ष आरती नेगी ने समलौण आंदोलन के संस्थापक शिक्षक वीरेंद्र दत्त गोदियाल के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राठ क्षेत्र से शुरू हुई यह पहल आज धीरे-धीरे एक व्यापक जनआंदोलन का रूप ले चुकी है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है,बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी भूमिका निभानी होगी। जिस प्रकार समलौण अभियान ने पर्यावरण को संस्कारों से जोड़ने का काम किया है, वह निश्चित रूप से अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि एक पौधा लगाना प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने की शुरुआत है,लेकिन उस पौधे को वृक्ष बनने तक संरक्षित करना उससे भी बड़ी जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि पौधारोपण के बाद उसकी देखभाल और संरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसी भावना के तहत रोपे गए रुद्राक्ष और जामुन के पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी रिसोर्ट के कर्मचारियों ने ली। वक्ताओं ने कहा कि पहाड़ की पारिस्थितिकी को बचाने के लिए स्थानीय प्रजातियों के पौधों को प्राथमिकता देना और उनके संरक्षण के लिए सामूहिक जिम्मेदारी तय करना समय की आवश्यकता है। जन्मदिन की खुशी बनी हरियाली की सौगात

अनिध्या के जन्मदिवस पर किया गया यह पौधारोपण समाज के लिए एक सुंदर संदेश भी छोड़ गया कि खुशियां केवल व्यक्तिगत उत्सव तक सीमित न रहकर प्रकृति और समाज के हित से भी जुड़ सकती हैं। आज लगाए गए रुद्राक्ष और जामुन के ये पौधे आने वाले वर्षों में जब वृक्ष का रूप लेंगे,तब वे न केवल अनिध्या के जन्मदिवस की स्मृति को जीवित रखेंगे,बल्कि पर्यावरण संरक्षण के उस संकल्प के भी साक्षी बनेंगे,जिसे उनके जन्मदिवस पर लिया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार अजय रावत,सामाजिक कार्यकर्ता संजय डुकलान,रिसोर्ट प्रबंधक गौरव असवाल सहित क्षेत्र के ग्रामीण एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

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